हाल में भारतीय रिज़र्व बैंक ने बड़े बड़े बैंक से ऋण (१५० कऱोड़ से ऊपर )देने के लिए दिशा निर्देश जारी करने हेतु एक ड्राफ्ट (रूपरेखा ) तैयार की है जिसे अन्य स्टेकहोल्डर्स जैसे बैँक आदि को सुझाव देने हेतु भेजा गया है ज़िसे २६ जून तक़ वापस भेजना है।
इसके आधार पर भारतीय रिज़र्व बैंक बड़े बड़े ऋण स्वीकृत करने हेतु डिश निर्देश जारी किये जायेंगे। आज जरुरतमंद लोगों को ऋण मिलने में काफी परेशानी होती है पर बैंक में बड़े ऋण तुरंत स्वीकृत होते हैं। पहले भी बैंकों में मानक तय होते थे और आज भी है फिर आज इसकी या जरुरत आ पड़ी ये सर्व विदित है। इधर बैंक घोटालों ने बैंकों की साख पर प्रश्न चिन्ह लगा दिया है।
ये भी नियम है कि जब कभी भी ऋण स्वीकृत होता है तो स्वीकृति उपरांत समीक्षा का प्रावधान है जो उससे एक पद ऊपर के अधिकारी या अधिकार प्राप्त समिति द्वारा पार्टी स्वीकृत होता है। ऐसे में सम्भाबना बहुत काम रह जाती है कि कुछ गलती हो जाये। यदि ऐसे में भी गलती होती है तो कही कहीं चूक जरूर है। या जानबूझकर हो रहा है।
हमारे बिचार से जो मानक तय हैं वे सभी पर्याप्त हैं। जरुरत इस बात की है की उसे कड़ाई से अमल किया जाये।
इसके आधार पर भारतीय रिज़र्व बैंक बड़े बड़े ऋण स्वीकृत करने हेतु डिश निर्देश जारी किये जायेंगे। आज जरुरतमंद लोगों को ऋण मिलने में काफी परेशानी होती है पर बैंक में बड़े ऋण तुरंत स्वीकृत होते हैं। पहले भी बैंकों में मानक तय होते थे और आज भी है फिर आज इसकी या जरुरत आ पड़ी ये सर्व विदित है। इधर बैंक घोटालों ने बैंकों की साख पर प्रश्न चिन्ह लगा दिया है।
ये भी नियम है कि जब कभी भी ऋण स्वीकृत होता है तो स्वीकृति उपरांत समीक्षा का प्रावधान है जो उससे एक पद ऊपर के अधिकारी या अधिकार प्राप्त समिति द्वारा पार्टी स्वीकृत होता है। ऐसे में सम्भाबना बहुत काम रह जाती है कि कुछ गलती हो जाये। यदि ऐसे में भी गलती होती है तो कही कहीं चूक जरूर है। या जानबूझकर हो रहा है।
हमारे बिचार से जो मानक तय हैं वे सभी पर्याप्त हैं। जरुरत इस बात की है की उसे कड़ाई से अमल किया जाये।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें